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Hymn No. 175 | Date: 07-Jun-1998
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जो हो रहा है होने दे न, उसकी मस्ती में खुद को खो जाने दें ।
जो हो रहा है होने दे न, उसकी मस्ती में खुद को खो जाने दें ।
जीना है तो जी हो उसकी यादों के संग, बिन उसके मौत के समान है ये जीवन ।
मुलाकात की तू अगर रखता है आस, उससे, इससे अच्छा तू भूल जा उसे ।
मन में ना रख कोई भी इच्छा, पाने न पाने के चक्कर में खुद को ना उलझा ।
युँ ही तू जीयें जा जिंदगी का हर पल, नाम उसका तू लिये जा ।
खेलता है आज तक वो सबके संग, तू खेलेगा उसके संग ।
अपने अरमानों को छोडके तू जोड ले अपने आपको उसके संग ।
तेरी हर इच्छा होगी उसकी इच्छा, तूझे नहीं माँगनी पड़ेगी किसीके पास भीक्षा ।
हर कोई आता है खाली हाथ, जाता है खाली हाथ, तेरे हाथों में होगा हाथ उसका।
जो कुछ ना तू सुलझा पाया है, वो यूँ ही सुलझा देगा, बस जोड ले अपने आपको उसके संग।
जीवन तो उसका दीया हुआ है, जो पाया तूने उसका ही दिया ।
जो पाया हैं खो जायेगा, जीवन के अंत में जो तू पायेगा, वो ही रह जायेगा ।


- डॉ.संतोष सिंह