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Hymn No. 1797 | Date: 03-Jun-2000
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मत देख तू हमको तिरछी निगाहों से, होश खो देता है दिल हमारा।
मत देख तू हमको तिरछी निगाहों से, होश खो देता है दिल हमारा।
बिन पीये लड़खड़ा उठते है कदम मेरे, हो जाती है ताल सुरेख।
रहता नहीं हर शब्द अपने आप में, हर शब्द ढलते है नजर रुप में।
मस्ती होती है, खुशनुमा रूप बदल जाती है शमाँ।
कितना भी पुराना लगता है नया, उमड़ पड़ता है ज्वार आनंद का।
मालिक तेरी रहमत देके मचल उठता हूँ तेरे पास आने के लिये।
ठीक – ठाक मुश्किल है कहना कुछ, हर होने को शब्द देना लगता है।
नवाते है सर तेरी बंदगी में, उठाते है विसर करके प्यार में तो है।
हो हाल हमारा कुछ भी, दिल नहीं करता तुझसे अलग होने का।
कुछ नहीं याद रह जाता, तेरे आने पे होंश पंख लगाके उड़ जाते।


- डॉ.संतोष सिंह