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Hymn No. 1798 | Date: 03-Jun-2000
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जो रात गुजारते है प्रभु की याद में, दिल रहता है उनका मसरूफ प्रभु के प्यार में।
जो रात गुजारते है प्रभु की याद में, दिल रहता है उनका मसरूफ प्रभु के प्यार में।
जो करने में रहते है मशगूल प्रभू का कहा, कितना भी कोई चाहे बिगडता नहीं कुछ।
जीवन में आये कैसे भी पहलू, मन को छू नहीं पाता कुछ भी
सानी रखते है वे अपने आप में, फिर भी रहते है नम्रता की खान।
मान हो या अपमान छू नहीं पाता कुछ दिल को, व्यवहार में करे चाहे जो कुछ।
सब कुछ पाके जीते है थोड़े में, औरो को सर्वस्व प्रदान करने में रहते है तत्पर।
गोया दाजी कोई न कर सकता है, वो बात अलग है जाने देते है बाजी हाथों से।
बाह्य आचरण कैसा भी हो उनके अंतर में विराजे रघुवीर सदा।
जो देखते है ध्यान से वे भी धीरे – धीरे फिदा होके करने लगते है लेहद।
आलम छाया रहता है मस्ती का, बिछुड़ते न कभी अपने बालम से वे।


- डॉ.संतोष सिंह