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Hymn No. 1801 | Date: 07-Jun-2000
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हुआँ है बूरा हाल मेरा, तेरे प्यार में साँवरे।
हुआँ है बूरा हाल मेरा, तेरे प्यार में साँवरे।
न हुआ घर का न घाट का, हालत हुई खराब।
तेरे दिल को देना चाहता हृँ, खुशियों की सौंगात।
कुछ ऐसा कर दिखांना चाहता हूँ, जो हर लूँ दिल को तेरे।
अपने प्यार को रस्मों फर्ज अदायगी ना बनने देंखना चाहूँ।
शुरूआत तो करता हूँ चरम से, हो जाता हूँ जल्दी ढेर मैं।
तेरा हर इम्तिहाँ होना चाहता हूँ पास, कैसे हो जाता हूँ फेल।
टूटा हुआ मन है रूठा ना दिल, आज नहीं तो कल जाऊँगा निकल।
सब कुछ होगा वैसे का वैसा, मनाऊँगा मौज तेरे संग।
रंग ना सका तो रंग दिखाऊँगा तन – मन के रंग में तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह