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Hymn No. 1802 | Date: 07-Jun-2000
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कोई अपना रोना – रोक, विचलित न करना चाहूँ दिल को तेरे।
कोई अपना रोना – रोक, विचलित न करना चाहूँ दिल को तेरे।
करा सका तो प्यार से, मजबूरियों का वास्ता देना न है यार तुझे।
गमों का सैलाब पी जाऊँगा चूपचांप, आने न दूँगा आँसू का कतरा आँखों में।
व्यथित करे कोई बात दिल को तेरे, उससे पहले कर जाऊँगा आत्मसात उसे।
चमन को करुँगा गुलजार खुशियों से, उठाना पड़े बोझ कितना भी प्रारब्ध का।
लयबध्द सुरों के संग छेडूंगा संगीत प्यार का, मजबूर करूँगा तुझे बेवक्त आने के लिये।
अरे तुझे अपना बनाने के वास्ते कर जाऊँगा वो सब कुछ जो चाहता है तू।
कितना भी मिलेगा सिला इंतजार का, महफूज होगा दिल तेरे प्यार में।
सहारों की न जरूरत है जीने के वास्ते, प्यार भरी नजर है काफी तेरी।
डर निकल गया है मन का तेरे प्यार में हो जाये चाहे कुछ मुझे।
- डॉ.संतोष सिंह
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