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Hymn No. 1803 | Date: 07-Jun-2000
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चिरआयु बनना चाहता हूँ, प्यार बनके दिल में तेरे
चिरआयु बनना चाहता हूँ, प्यार बनके दिल में तेरे
बेखबर हो जाना चाहता हूँ, दामन से लिपटके तेरे।
परे हो जाना चाहता हूँ, दुनिया में रहके वास्ते तेरे।
हर वो कदम कर जाना चाहता हूँ, जो हो पसंद तुझे।
नकार देना चाहता हूँ अस्तित्व को अपने, मिलन के वास्ते तुझसे।
खुशी हो या गम न रहा मतलब किसीसे, मतलब है तो वास्ते तेरे।
अपना न रहा अब कूछ, अपना ले मुझे जो तू।
न जाना चाहता हूँ कही ओर, तोडूंगा दम दर पे तेरे।
नाकामियों का कोई गिला नहीं, हमको मिल गया जो तू।
खत्म हो जाये जीवन कोई बात नहीं, दिल को मिल गया जो तू।


- डॉ.संतोष सिंह