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Hymn No. 1805 | Date: 09-Jun-2000
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मत भेज हमको तुझसे दूर, तड़पता है दिल याद कर – करके।
मत भेज हमको तुझसे दूर, तड़पता है दिल याद कर – करके।
लगी है आग सीने में, तू ही बता चैन कैसे आयेगा हमको।
करना न चाहूँ प्यार का रोना – रोके, कोई भी अतिशयोक्ति पूर्ण काज।
बता दे तू आज मुझको राज की वो बात, जो करने गुजरने से मिलता है तू।
जीना होता जा रहा है दुश्वार, कसूरवार बनता जा रहा हूँ विरह में।
तेरे पास रहने तक तो ठीक है, तुझसे होना दूर कर देता है हमको मजबूर।
फिर सालता है हर पल वो, रोता हूँ रोना अपने किये का तेरे आगे।
निकला हूँ तुझे प्यार के धागें से बांधने, ना ही कोई नया बखेड़ा करने।
डर गया हूँ भीतर से, अपना बनाना है तुझे कुछ भी करके बेधड़क मुझे।
अदना सा हूँ मैं फिर भी पाले हुये हूँ हसरत तुझे अपना बनाने की।


- डॉ.संतोष सिंह