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Hymn No. 1807 | Date: 14-Jun-2000
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जब भी आता हूँ पास तेरे, हो जाता है दिल बेकाबू।
जब भी आता हूँ पास तेरे, हो जाता है दिल बेकाबू।
लपक के लेना चाहता हूँ चूम लबों को तेरे, रहता नहीं मन काबू में।
उस पल टूट जाता है नाता दुनिया भरके सारे ख्यालों से।
सच कहता हूँ याद नहीं आता कुछ, रहता है जो तू हजूर।
मंजूर है हमको कुछ भी, तेरे बिना जो रह नहीं पाते हम।
जड़े जमां चुका है तेरा प्यार छाया है ऐसा सरूर जो मेरे ऊपर।
कैसे सुनाऊँ हाल दिल का, नामुमकिन है क्याँ करना शब्दों के द्वारा।
जानना है तो देख मेरी आँखो मैं, आँसूओ में छिपी है प्यार की दाँस्ता।
अंजाम हों चाहे जो बाज न आऊँगा तुझे प्यार करने से।


- डॉ.संतोष सिंह