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Hymn No. 1808 | Date: 14-Jun-2000
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कहना चाहे दिल बहुत कुछ, कहे बिना न रह पाये तुझसे।
कहना चाहे दिल बहुत कुछ, कहे बिना न रह पाये तुझसे।
लगा है दिल को रोग जो आशिकी का क्या हो जाये पता नहीं।
मस्ती में गुजर रहा है रात – दिन, छाया है नशा मन पे प्यार का।
कुछ हो जायेगा जो हमको, तोहमत देंगे हम तुझको।
याद करना होता जा रहा है मुश्किल, जो भरता नहीं मन प्यार से।
सकून मिलता नहीं नजरों को, जब तक देंख न लूँ तुझको।
बिन् पीये छाया रहता है नशा, बिगड़ती जा रहीं है मेरी दशा।
दिल ना लगता हैं कही और, जब तक न पहुँच तेरे दरबार में।
समाँ जो बंधती है तेरी महफिल में, खत्म न होने देना इस दौर को।
मेरे काबू में न रह गया कुछ, हम खो चुके जो प्यार में तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह