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Hymn No. 1810 | Date: 15-Jun-2000
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मेरे प्रिय को न कुछ कहो, वो तो सदा से है निराला।
मेरे प्रिय को न कुछ कहो, वो तो सदा से है निराला।
बहुतो को देखा न पाया किसी को वैसा, अंदाज है उसका सबसे आला।
न जाने कितनो को ढाला अपने में, पीलाके प्रेम रस का प्याला।
ठहराये हर ख्याल को गलत, करने का अंदाज है उसका सबसे अलग।
रहता है भीड़ में पहचानना है मुश्किल, बच नहीं पाता फिर भी किसी प्रेमी के नजरों से।
खबर होने ना दें कभी किसी को कुछ, कर दिखायें सबकुछ गुपचूप।
लिया नहीं किसी बात का श्रैय, देता रहा चाहने वालो को वो सब।
कहना है मुश्किल क्या करता है वो, समझने को चाहिये उसकी रजा।
दिया है दगा कई बार अपनों ने, फिर भी लुटानें से बाज न आया अपने को।
हर हालात में है खुश, कर देता है मस्त हर बात में वो।


- डॉ.संतोष सिंह