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Hymn No. 1812 | Date: 15-Jun-2000
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मैं रहता हूँ हर पल खोये हुये ख्यालों में।
मैं रहता हूँ हर पल खोये हुये ख्यालों में।
बुनता हूँ हर पल लेके नये – नये ख्वाब तुझे।
सच है या झूठ मुझे मालूम नहीं पर देखता हूँ जरूर।
सुरूर छाया है तेरे प्यार का, होगा हॉल जो भी है मंजूर।
तेरे सिवाय कोई अब न बन सकता मेरा हजूर।
चलता रहे दौर मस्ती का, हो जाये हाल कैसा भी।
सोचा न था प्यार करते वक्त, अब मंजूर है सब कुछ।
जो भी हो जरूरी तुझे पाने के वास्ते, तू करना मेरे साथ।
अब न डरता हूँ इंतजारी से, फिर भी रहता हूँ अधेड़ बुन में।
धुन एक ही है दिल में मेरे, क्या कर दूं हो जाऊँ तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह