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Hymn No. 1813 | Date: 15-Jun-2000
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अंदाज है सबका अपना – अपना, प्यार करके निभाने का।
अंदाज है सबका अपना – अपना, प्यार करके निभाने का।
कोई न दोहरा सका, हर इक् ने गढी प्यार की नईं कहानी।
कितना भी चाहूँ तुम, कर न सकते हो इसकी नकल।
किसी भी मदरसे में जाके तुम न पढ़ सकते इसकी पढाई।
लड़नी पड़ती है इसके वास्ते प्यार की लड़ाई दिल से।
दीवाने ही जानते है आलम क्या होता है प्यार में।
जिस्म की परवाह न करते, हो जाती है रूह भी फना।
होते है अस्तित्वहीन अस्तित्व रहते हुये प्यार करने वाले।
अरमानो से बुनते है नये – नये ख्वाब यार को लेके।
वो तो मस्त रहते है हर हाल में अपने प्यार को लेके।


- डॉ.संतोष सिंह