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Hymn No. 1814 | Date: 15-Jun-2000
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मुझे वो याद आ रहा है, जिससे मुझको प्यार है।
मुझे वो याद आ रहा है, जिससे मुझको प्यार है।
निश्चित ना लगता है, क्या कहना चाहिये मुझे उससे।
कभी करता है मन, लिपट जाऊँ तुझसे सरेआम मैं।
रहता नहीं आपे में, जो खो जाता हूँ उसके ख्यालों में।
तोहमत लगाता है वो हमको, प्यार करने आता नहीं।
कई - कई बार पूछा तू ही बता दे कैसे करते है प्यार।
यार हम तो पहले से थें बेकार, दिया हुआ जतन कर न पाये।
रस्में न जानतें है कसमें खातें है प्यार निभाने की।
होगी लाखों कमियाँ, पर प्यार है सच्चा तेरे वास्ते।
दूर करना है तुझे – हमको, अपना बनाने के वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह