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Hymn No. 1815 | Date: 15-Jun-2000
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मैं दीवाना बननां चाहता हूँ, तेरा प्यार पाने के वास्ते।
मैं दीवाना बननां चाहता हूँ, तेरा प्यार पाने के वास्ते।
मैं मस्ताना बनना चाहता हूँ, तेरा प्यार की मस्ती में रहने वास्ते।
मैं परवाना बनना चाहता हूँ, तुझपे फिदा हो जाने के वास्ते।
मैं यार बनना चाहता हूँ, तेरा मिटाने सारे भेद के वास्ते।
मैं भक्त बनना चाहता हूँ, तेरा हर पल पल नामरस पीने के वास्ते।
मैं पपीहा बनना चाहता हूँ, तेरे विरह की आग में जलने के वास्ते।
मैं गवैया बनना चाहता हूँ, तेरे गीतों को गाते – फिरते रहने के वास्ते।
मैं प्रेम पुजारी बनना चाहता हूँ, पूजा में निमग्न हो जाने के वास्ते।
मा हर वो कुछ बनना चाहता हूँ, जो छू ले तेरे दिल को।


- डॉ.संतोष सिंह