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Hymn No. 1818 | Date: 16-Jun-2000
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बदल दे रूप तू मेरा प्रियतम् तेरे स्वरूप में।
बदल दे रूप तू मेरा प्रियतम् तेरे स्वरूप में।
निकल जाये डर दिल का, मिलन में मिट जाये अस्तित्व तेरा।
तिरना चाहता हूँ प्रेम में डूबके, बादल बनके बादलों के संग।
छेड़ना चाहता हूँ पक्षियों के संग बनके पक्षी गीत नभ में।
रहना चाहता हूँ डूबा तरन्नुम में प्यार की तरंग बनके।
अस्तित्व होते हुये अस्तित्वहीन होके रहूँ वादियों में।
झूमना चाहता हूँ पेड़ो के संग बनके पेड़ बहारों के संग
कुछ ना हो ऐसा जो कराये भेद तुझसे अलग होने का।
समंदर की मौजों पे इतराओ, प्यार की मौज बनके।
धमाल इतना मचाऊँ मन से निकल जाये ख्याल मानव होने का।


- डॉ.संतोष सिंह