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Hymn No. 178 | Date: 15-Jun-1998
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सबसे अलबेला तू हमारा ही नहीं सबका परमपिता है
सबसे अलबेला तू हमारा ही नहीं सबका परमपिता है
जिसने तुझको जाना, हर दीवार को तोड़के खुद को सबसे जोडा ।
जिसने जो चाहा उसको तूने वैसा ही दिया
तेरे दर से आज तक कोई नहीं गया खाली हाथ ।
अपने पुत्रों पे तूने अपना सब कुछ लुटाया;
सदियों से तेरे पुत्र जमा कर – करके लुटते रहे तुझको ।
वो ना तडपे तेरे लिये, तेरा नाम भी लिया कुछ पाने के लिये;
देखी तेरी हमने दरियादिली, अपनो से हर पल तू लुटता रहा ।
जिसने तुझसे कुछ न माँगा, उसको दुनिया की नजरों में कुछ ना देके सब कुछ दिया ।
उस दर पे माथा टेकने के लिये अमीर हो या गरीब हर धर्म के लोग पहुँचे ।


- डॉ.संतोष सिंह