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Hymn No. 179 | Date: 16-Jun-1998
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दिल गुनगुनाने लगता है जब नजर आती है तेरी छवि,
दिल गुनगुनाने लगता है जब नजर आती है तेरी छवि,
मन ही मन मुस्करा उठता हूँ तेरे ख्यालों में खोने पे ।
पागलपन सा सवार हो जाता है तेरी याद आने पे;
मदहोशी का आलम कुछ ऐसा होता है; ये मेरी बेहयाई नजर आती है।
गाते ही गीत तेरा होश – हवाश खो देता हूँ, दुनियादारी का होश किसे;
अलग – अलग हर चेहरे पे तेरी ही छवि नज़र आती है ।
कष्टमय जो पल होते है, तेरा नाम लेते ही आसान सा बन जाता है;
हम जैसे नामुरादो की हर मुराद तू कर देता है पूरी यूँ ही ।
गाहें – बगाहें तेरी कृपा से तेरे शरण में रह लेते है पल दो पल,
पल दो पल को, तू बदल दे, आजीवन का साथ में तैयार है तेरा बंदा ।


- डॉ.संतोष सिंह