VIEW HYMN

Hymn No. 1821 | Date: 18-Jun-2000
Text Size
माफ करना मेरे, मुझे भी न है पता, कब तक चलेगा सिलसिला माफियों का।
माफ करना मेरे, मुझे भी न है पता, कब तक चलेगा सिलसिला माफियों का।
करना चाहा हर बार तेरा चाहा, कर गुजरा कुछ और जो न था तुझे कबूल।
रूचता नहीं दिल को, मन भी हर ओर से भाग तेरे प्यार की ओर।
ऐसी कैसी आदत लगा दी तूने, जो छुड़ाये न छुटे कर गुजरे कुछ ओर।
प्यार का जश्न मनाना चाहूँ, हालत हो कैसे भी होने न देना चाहूँ खत्म इस दौर को।
पता है तुझे कि नहीं तेरे सिवाय करता नहीं गौर मेरी बात पे, औंरों की छोड़ मैं खुद भी नहीं।
उबारा है तूने सदा से, तेरी मर्जी के बिना उबारने की हालात न आने देना चाहूँ।
कसम से बाँध दे तेरे प्यार में कसके, मिट जाये सारा भार करने न कर दिखाने का।
बड़ी ही कुत्ती चीज हूँ जितना छुटकारेगा उतना ही करीब तू पायेगा।
सौदा करने की ताकत नहीं, हाँ मिन्नत करुँगा रहके तेरे पास अनेको – अनेक बार।


- डॉ.संतोष सिंह