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Hymn No. 1823 | Date: 21-Jun-2000
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हमको मस्त रहने दे तेरे प्यार की मस्ती में।
हमको मस्त रहने दे तेरे प्यार की मस्ती में।
ना होना है तेरे सिवाय संवार किसी और की किश्ती पे।
जुड़ा रहना चाहता हूँ तुझसे ना ही किसी और से।
दिल में हें तमन्ना तेरे प्यार में खों जाने की।
सच पूछों तो रूचता नहीं दिल को कुछ और अब।
रहूं दुनिया के किसी छोर पे, चाहता हूँ तेरा साथ।
हाथों में न है कुछ और मेरे, पर रखनां चाहूँ तेरा हाथ।
जो भी हो मेरा अच्छा – बुरा, हों हाथों तेरे।
अजीब दास्ताँ है मेरे प्यार की, यार के रहते तड़पता हूँ।
चाहता हूँ प्यार दिलोजान से करना, रह जाती है कमी कहीं ओर।


- डॉ.संतोष सिंह