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Hymn No. 1824 | Date: 21-Jun-2000
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खो जाने दे लेके तुझे प्यार भरे भावो में।
खो जाने दे लेके तुझे प्यार भरे भावो में।
साथ न हो किसीका, तेरे सिवाय वहाँ रहूँ न मैं।
दाव पे लगता हो मेरा सब कुछ तो भी कोई बात नहीं।
पर हाथ से न जाने दूँगा तुझे चाहे हो जाये कुछ।
जीतने की बात तो ना हूँ करता, पर लूटा देना चाहूँ तुझे सब कुछ।
रब कब होगी मेरी बात पूरी, क्या अभी जरूरी है दूरी।
सितमगर अब तो सारा समा सितम ढाता हूआँ है लगता।
प्यार में तेरे छाया हुआ है बेपरवाही का आलम मुझपे।
नागवारी सह लेता हूँ सबकी, सही नहीं जात है तेरी।
कब टूटेगी मन की जेल, हो जाये जो तेरा – मेरा मेल।


- डॉ.संतोष सिंह