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Hymn No. 1825 | Date: 22-Jun-2000
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कुछ अजीब है, कुछ गरीब है, सकून है कि तेरे करीब है।
कुछ अजीब है, कुछ गरीब है, सकून है कि तेरे करीब है।
रूकता नहीं रोके कुछ, कर लू चाहे कितना कुछ सिवाय तेरे।
जिंदगी जीना चाहता हूँ होके गुमनाम तेरी बंदगी करते।
न आयेगा कुछ काम प्रियतम् तेरे नाम के सिवाय।
डूब जाने आकंठ दे तेरे प्यार के जाम में हमकों।
दम ना है हममें इतनी जिद् में आके कर जाये कहाँ तेरा।
आहत करूं तेरे दिल को कहीं, उससे पहलें फनाह हो जाना चाहूँ।
जन्नत की न है चाहत, खाकसार खाक बनके जीना चाहे कदमों में तेरे।
अदने की इतनी सी रजा है, तेरा हुक्म निभाऊ सर आँखों पे रखके।
सिरफिरें का मन बदलें कभी, तो भी ना होंने देना दूर तुझसे।


- डॉ.संतोष सिंह