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My Divine Blessing
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Hymn No. 1832 | Date: 28-Jun-2000
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कायदे की बात है यार प्यार में तेरे जीवन जीना चाहता हूँ होके बेकायदा।
कायदे की बात है यार प्यार में तेरे जीवन जीना चाहता हूँ होके बेकायदा।
निभाके सब कुछ, निभाना नहीं चाहता जीवन का कोई रस्म।
सरेआम बेलगाम होके झूमना चाहता हूँ दीवानगी के आलम में।
किसी के कहे का कोई मतलब नहीं, नजरें उठें हमारे ऊपर हम हो बेखबर।
दरबार है तेरा सारा जहाँ, बंदगी करने के लिये न जाना चाहूँ किसी विशेष मकान में।
तौबा है हर उस धर्म से, जो खटकाये मन में अविश्वास तू यहाँ है वहाँ नहीं।
बन जाने दे बावरा फिरना चाहता हूँ मारा – मारा, यहाँ – वहाँ हर पल मुलाकात हो भले।
छलते रहना तू मुझे भेष बदल – बदलके, मदहोश हो जाऊँगा खेल – खेल देखके।
दिल में बात है अनेक,कब क्या कह जाऊँ तुझसे, इसका न है मुझे होश।
दोष न मैं दूँगा तुझे, कर चाहे कुछ भी तू संग मेरे पर रखना तेरे प्यार की मस्ती में।
- डॉ.संतोष सिंह
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