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Hymn No. 1834 | Date: 29-Jun-2000
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आयाम देना है तुझे मेरे प्रेम भरे शब्दों को।
आयाम देना है तुझे मेरे प्रेम भरे शब्दों को।
आकार लेना है तुझे मेरे निरंकुश दिल में प्यार बनके।
प्यार की करनी है बरसात मुझे अपने साथ बहा ले जाने के वास्ते।
अंदाज बदलना होगा हमें अपने संग थिरकने के वास्ते।
आने के वास्ते तेरे, खोलना होगा दिल के दरवाजे को मेरे।
गिरे कोई भी गाज जीवन में, न आना तू बाज प्यार करने से।
डर निकाल दे मेरे मन का, निडर होके करूँ प्यार तुझे।
कमियाँ तो है कई, करनी होगी दूर तुझे हर इक् को।
बेचने के वास्ते न है कुछ पास मेरे, बिकना चाहूँ फिर भी हाथों तेरे।
देर न करना तू खरीदने वास्ते, धेले भर का मोल न है मेरा।


- डॉ.संतोष सिंह