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Hymn No. 1835 | Date: 30-Jun-2000
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सवाल न कर तू कोई, लेके दिल को मेरे।
सवाल न कर तू कोई, लेके दिल को मेरे।
भटकता होगा मन, पर तेरे सिवाय न फटकने दूँगा किसीको।
मसरूफ हूँ प्यार में तेरे, महफूज ना करना किसी बात को लेके।
तेरी कृपा का है ये परिणाम, नहीं तो थे हम बेकार।
चरणों में बहाये बिन् नीर, आता नहीं है चैन हमको।
हम जो भी थें उस बात से अलग हो गये है हम तेरे।
सताने की डर से न कहता हूँ, बताना चाहता हूँ बात दिल की।
आदतन होगी लाख कमियाँ, वारना चाहूँ एक साथ सब तुझपे।
गुल तो मुझे खिलाना है मेरी भूल सुधारने के वास्ते।
धुल बनके रहना पड़े कदमों में तेरे तो भी कबूल है हमको।


- डॉ.संतोष सिंह