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Hymn No. 1839 | Date: 02-Jul-2000
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जी भरके कर लेने दे प्यार तू हमको, और मत कर इंतजार।
जी भरके कर लेने दे प्यार तू हमको, और मत कर इंतजार।
अतृप्त है मन मेरा, तरसता हूँ बहारों के मौसम में तेरे वास्ते।
व्याकूल हो उठता है चित्त, नजरें ना टिकती किसी एक पे।
खोजता हूँ तुझे सदा, चाहे चारों और भीड़ हो या सूनापन।
दूना हो जाता है जोश मेरा, पा जाता हूँ झलक किसी चेहरे पे तेरी।
मत पूछो हाल मेरा, आपे में रहके रह नहीं पाता आपे में।
कैसे बताऊँ यें ना कोरी गप्प है, ये तो बात है दिल की।
आती नहीं रस्म प्यार की, कैसे निभाऊँ कसमें प्यार के।
हवा हो जाती है सारी बातें, जब खो जाता हूँ प्यार में तेरे।
डर – डरकें भाग जाता हूँ, जब छाने लगता है सुरूर तेरे प्यार का।


- डॉ.संतोष सिंह