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Hymn No. 1840 | Date: 02-Jul-2000
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तौबा, तौबा प्रभु क्या चीज बनायी थी तूने, और क्या बन गया मैं।
तौबा, तौबा प्रभु क्या चीज बनायी थी तूने, और क्या बन गया मैं।
पैदा होते चला दुशवारियों का दौंर, तरस उठी धरा प्यास के मारे।
न जाने कितने असंख्य पापो का अंश लेके जन्म हुआ मेरा।
मां – बाप की आस टूट गयी, सिलसिला जो शुरू हुआ नाकामियों का।
परिवार कतराने लगा, छाया पड़ते ही घट न जाये कब कुछ घोर।
अपने – पराये बन गये, तौबा – तौबा कर उठा सारा समाज हमारा।
अरे मैं बेह्या इतने से न मांना, यह सब जानके परम ने बुलाया पास अपने।
जिसकी नजर पड़ते बदले हर कन – मन, पर इस खोर पे न चला उसका जोर।
तब शोर हुआ चारों और तौबा – तोबा, इस इंसा रूपी आदमखोर से तौबा।
तब कहाँ प्रभु ने न आना इसकी बातो में, अच्छे बुरे में बुराई से भरा रोल है निभाना इसे।
देखके पहचान लो तुम ध्यान से, तौबा – तोबा करना मेरा नाम मन में आते ही।
फटकारना ऐसा तुम, कभी फिर न हिम्मत करूँ तुम्हारे गतियों में आने की।


- डॉ.संतोष सिंह