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Hymn No. 1842 | Date: 03-Jul-2000
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अर्पित है तेरे चरणों में सब कुछ मेरा।
अर्पित है तेरे चरणों में सब कुछ मेरा।
घोल दे मेरे जीवन में तू प्यार भरा अमृत।
जब भी फूटें मेरे कंठ से बोल – डूबे सब प्यार में।
किंचित ना करूं परवाह अपने – परायो की।
बरसू बिन् भेद – भाव के सब के ऊपर।
हम होके बेखबर सबसे, मसरूफ रहे तेरे प्यार में
यार हो जाये कुछ भी महरूम ना रखना प्यार से
ऊपर में कोई हो ओर चोला तो क्या जुड़ा रहे तुझसे।
चलता रहे दौर प्यार का, न खत्म हो ये कभी।
समझ से परे बेखबर हो प्यार में तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह