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Hymn No. 1843 | Date: 04-Jul-2000
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भाग्य का दिया हुऑ मिलता है, रोके ना रोके किसीके ये।
भाग्य का दिया हुऑ मिलता है, रोके ना रोके किसीके ये।
प्रभु से अगर कुछ है पानां, तो विश्वास के सहारे करनी पड़ती है पुरूषार्थ।
बदल देता है भाग्य को, वो भी मिलता है जो ना होता है भाग्य में।
बड़ी अनोंखी बात है जो उसके हाथ में है, वो मिलता है हमारे यत्नों के सहारें।
रहबर के दरबार से ना कोई खाली लोटां, जो लोटकें लूटायें तो कहाँ उसकी गलती।
हमारे खामियाजों को कई बार तूने भूगता, फिर भी रहे हम बेसुधी में तो कौंन क्या करें।
एक ही बात है अगर आदत से तू मजबूर है तो छोड़ दे उससे फरियाद करना।
जो भी होगा पीना है उसके प्यार का जांम, सुबहों – शाम लेते हुये उसका नाम।
चखाया है तूने उसपे दाग ढेंरों, मिटा ना सका तो कोई और नया दाग नाच रंचाना।
चुपचाप उसके मैं बहते जाना, बदलेंगा वो सब कुछ अगर तू ना छोड़sगा साथ होके ध्येय का।


- डॉ.संतोष सिंह