My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 1846 | Date: 05-Jul-2000
Text Size
माना प्रियतम् तू सुनता है हमारी, पर करते है हम अपने मन की।
माना प्रियतम् तू सुनता है हमारी, पर करते है हम अपने मन की।
आँसू देखके मेरे न करना कोई हेर – फेर, समय आने पे ठहराता है तू सही।
भाँप नहीं पाता हूँ और, बह जाता हूँ अपने सड़ी – गली रौ में।
क्या है सही – क्या है गलत मेरे वास्ते, तुझसे जियादा मैं नहीं जानता।
करना – करवाना सब कुछ तुझे है, पड़ी न है इस निकम्मे को कुछ।
मेरी बात कोई तू न रखना, माना हाल दिल का है तू जानता फिर भी कहला लेना।
तनिक इतना चाहता हूँ अगर तू मानता है, जो भी करवाना करते जाऊँ दिल से।
खिल उठे तन – मन मेरा कहाँ करने से, मिट जाये मन की सारी हिचक।
गचकाती रही है यहीं बात कई बार, यार मेरे अब न तू फिर गचके देना।
जीयाँ जीवन कई बार बनके मैं, मिटाकें इसे बनके तेरा तू जी लेने देना।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
इसा के खेत में आया हूँ बनके आदमखोर, कई बार लिया प्राण तेरा।
Next
बरसें अखियाँ बरखा के समा, गाहे – बगाहे तुझे याद – कर करके।
*
*