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Hymn No. 1849 | Date: 06-Jul-2000
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कुछ भी कह ले, तेरे कहने को न माना गलत कभी।
कुछ भी कह ले, तेरे कहने को न माना गलत कभी।
हालात बद से बद्तर होते है, फिर भी चाहा हूँ तुझे सदा।
बहुत बड़ा ना कोई काम किया, जो भी किया तेरे नाम ने किया।
लेने देने से तमन्ना है, प्रियतम को प्यार करने की।
आँसू बहें कई बार, उसमें लेशमात्र न दुःखो का अंदाज।
वो तो उपजे थे तेरी कृपा से, निर्मल प्यार के याद में।
दम न था हममें इतना कृपानिधान, छू सके चरणों को तेरे।
तेरे प्यार का है ये जादु, जो करता है मजबूर चूमने को तेरे लबों को।
दाखिल हुआ था तेरे पास तो न जाना होगा ये हाल हमारा।
समझ गया तेरे प्यार भरे जॉल को, इसमें ना चुरती है तेरी दाल।


- डॉ.संतोष सिंह