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Hymn No. 181 | Date: 16-Jun-1998
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गुजारने को गुजर जाती है ये दुनिया, हम तो अपना हर पल तेरे संग गुजारना चाहें,
गुजारने को गुजर जाती है ये दुनिया, हम तो अपना हर पल तेरे संग गुजारना चाहें,
रंग के तेरे रंग में ।
जंग हमारी अपने आप से है, अपनी कमजोरियों से लडके कितना जुड सकते हैं तुझसे
तेरे करीब आनें की चाहत हमारी सदियों पुरानी है, अपनी हर पल तीव्र कल्पनाओं के चलते दूर हो जाते है तुझसे ।
उलझे रहते है अपने आप में, हर दिन नये – नये कर्मों के जाल बुनते है खुद के लिये, फिर पछताते है तेरे पास आके ।
छोडने को छोड नहीं पाते, ना ही खुद को तुझसे जोड पाते है, आश रखते है तुझसे
की होगी कृपा तेरी हमपे इक् दिन ।
जीतने की बातें करते है और कहते फिरते है की ये करूँगा वो करूँगा, पर खुद को खुद से जीत नहीं पाते ।
भुला नहीं पाते अपने भूत को, वर्तमान में तेरे संग रहके तुझसे नहीं जोड पाते है खुदको
फिर भी तू उसे साथ लेके है चलता, धीरे – धीरे हमारी दुनिया तू देता है बदल, पता नहीं चलता हमको ।


- डॉ.संतोष सिंह