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Hymn No. 1851 | Date: 07-Jul-2000
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रह नहीं जाता कुछ सोचने को, जब कह देते है कुछ मेरे गुरू।
रह नहीं जाता कुछ सोचने को, जब कह देते है कुछ मेरे गुरू।
ढालते है अपने में अपना बनाके, फिर भी तवज्जों देते है हमारी इच्छाओं को।
करते है शमन एक एक करके मनोविकारों का, दमन न करते कभी।
सिखाते है इतनी सरलता से, किंचित मात्र का अनुभव होता नहीं कठिनतर का।
अपनो के साथ-साथ गैंरो को भी अपनाते है, जैसे नाता है जन्मों पुराना।
कठिनता भरी बात सरलता से बताते है, जब देखो तब नजरों से प्यार बरसातें है।
बेदाग जीवन जीने वालों का करते है सम्मान, दाग वालो को भी देते है पहचान।
हर कोई चाहे उनका मान करने को, पर वे देते है सम्मान प्यार से लोगो को।
बड़ा अजीब खेंलते है खेंल, जो है वो न दिखाके कुछ और खेल दिखाते है हमको।
अज्ञानी के भूल को करना क्षमा, ना है हिम्मत कुछ कह सकूं तेरे बारे में।
- डॉ.संतोष सिंह
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