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Hymn No. 1853 | Date: 09-Jul-2000
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माँ कितना प्यारा है तेरा उच्चारण, दिल को रास ना आये इसके सिवाय कुछ।
माँ कितना प्यारा है तेरा उच्चारण, दिल को रास ना आये इसके सिवाय कुछ।
तेरा प्रेम तो है वर्णन से परे, पता नहीं कैसा है मेरा प्रेम तेरे प्रति।
पर माँ जब भी पुकारता हूँ, तब जाता है डोल दिल मेरा मनके सवाल देखके।
बवॉल करने के वास्ते ना, पर स्वीकार है पहले से जानने का करता है मन।
माँ ऐसी क्या हुयी खता, जो देनी पड़ी तुझे इतनी कड़ी सजा।
कितनी व्यथा हुयी होगी तुझे, देते हुये सजा पीया होगा आँसू दिल ही दिल में।
हम भी कर्मों के हेर-फेर, न जाने कौन से चक्कर में किया तुझे मजबूर माया में भेजने के वास्ते।
तेरे पास बचा न कोई और शस देखके पीछे की हमारी दोस्ती।
मगरूर घमंड से चूर समझ न पाया, तब याद आयें तेरी बहुत।
कब तक रहेगी तू मुझसे रुसवा, तो करवा ले कुछ मुझसे कर दे दूर तेरी रुसवाई को।


- डॉ.संतोष सिंह