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Hymn No. 1855 | Date: 11-Jul-2000
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जीवन पथ में चलना चाहता हूँ बनके हमसफर तेरा।
जीवन पथ में चलना चाहता हूँ बनके हमसफर तेरा।
शुरूआत तो करता हूं साथ, न जाने कब जाता हूँ पिछड़।
यादों में तेरे गुमनाम होके, बिसरा देना चाहता हूँ जीवन को।
तन हो या मन बह न जाये पास मेरे कुछ जो याद दिलाये मेरी।
इस संसार में आया हूँ तेरे वास्ते, ना कुछ कर दिखाने वास्ते।
तेरा कहना – करना सीखा नहीं, पर अब भी है सब कुछ मेरे वास्ते।
चलूंगा तेरे साथ या पीछे – पीछे, काटूंगा ना कभी तेरी राह को।
मुश्किल हो तेरे बगैर जीना, पल भर का भुलना छुड़ा जात है पसीना।
लाख मिल जायेगे जहाँ में, पर तुझसा हसी साथी न मिलेगा कभी।
हसरत एक ही है, अब उसे पूरी करने के वास्ते करुँगा हर कसरत पूरी।


- डॉ.संतोष सिंह