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Hymn No. 1858 | Date: 12-Jul-2000
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प्रभु बरस रही है तेरी कृपा, बनके बरखा चारों ओर।
प्रभु बरस रही है तेरी कृपा, बनके बरखा चारों ओर।
देखा न था कभी, तेरे प्यार का इतना जोर।
शोर था आज तक, सारे जमाने में तेरे बेवफा होने का।
सोचा न था दिल, कि करता है हमको तू प्यार इतना।
शरमा गया अपने आप पे, फरियादों के सिवाय कुछ न किया था।
तेरी रजामंदी है तो निहार लेने दे जी भरके तुझको।
उलाहने दिया नजरअंदाज करने का, प्यार देखके भरम टूट गया।
तेरे – मेरें बीच सौंत थी मेरा अपना निकम्मापन।
दफन कर दूँगा पुरूषार्थ के हाथों से, अंतर तक तरबतर हो जाने के वास्ते।
रहेगा अब कोई भी मौसम, भीगेगा मेरा दिल तेरे प्यार में सदा।


- डॉ.संतोष सिंह