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Hymn No. 1863 | Date: 14-Jul-2000
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हुकूर पुकूर होता है, जब दिल प्यार में खोता है।
हुकूर पुकूर होता है, जब दिल प्यार में खोता है।

उहूँ – उहूँ करके रोते हुये मन को मिल जाता है चैन।

खुसर – पूसर करने का मौका मिल जाता है लोगों को।

हा हा, हूं हूं पहलें तो मजा बहुत आता है फिर हो जाते है बेचैन।

ला ला, लू लू लम्हाँ गुजरने का नाम नहीं लेता इंतजार में होते है बेजार।

गा गा, गु गु गा उठता है दिल पल मिलन का आते खिल उठता है रोम रोम।

जजर जजर कदम धरा पड़कें पड़ते नहीं उड़ते है हम अक्षमा में।

ससा, ससू, हिलोर लेती है न जाने कैसी मस्ती खो बैठते हैं सब कुछ।

दईया रे दईया बचता नहीं कुछ अस्तित्व छोड़के मिटते को रहते है बेकरार।

सूसू सूस काना फूंसी कुछ और होती है लोगों में होता है कुछ ओर असल में।


- डॉ.संतोष सिंह