My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 1864 | Date: 15-Jul-2000
Text Size
गुरू पूर्णिमां के सुअवसर पे।
गुरू पूर्णिमां के सुअवसर पे।
किस मुंह से करूं तेरी महानता की चर्चा जब पड़ जाते हो अच्छे शब्द।
मेरी औकात से परे है तू, तेरे सामने जहाँ में न किसी कि बिसात।
ब्रम्हा, विष्णू, देवों के देव महादेव के समकक्ष है तू, रमता रहे परम् में सदा।
परम् तो बंधा है अपने नियमों से, तुझपे रीझके करे फेर – फार किसीके जीवन में।
मत पूछ तू क्या ना है मेरे वास्ते, दम न था मेरी दास्ताँ में जुड़ते ही तुझसे मजा आ गया।
तेरी इक् नजर है काफी, तन – मन् के अस्तित्व को बदल डालने के वास्ते।
किस्मत् है उनकी जिनको मिला राह में तू, होता है उनके जीवन का गुलजार हर पल।
बेजा है मेरा कहना कुछ भी तेरे बारे में, बात ऐसी लगे जैसे कोई दीप दिखाये सूरज को
माना कोई न है गुन हममें तुझे रिझाने के वास्ते, पागलों से भी गया गुजरा हूँ मैं।
कर दें इतनी कृपा कि हो जाऊँ पागल तेरे वास्ते सदा के लिये समझे कोई चाहे कुछ भी।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
हुकूर पुकूर होता है, जब दिल प्यार में खोता है।
Next
ऐ। मेरे तारनहार, सुन ले तू मेरे दिल की पुकार।
*
*