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Hymn No. 1865 | Date: 12-Jul-2000
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ऐ। मेरे तारनहार, सुन ले तू मेरे दिल की पुकार।
ऐ। मेरे तारनहार, सुन ले तू मेरे दिल की पुकार।
ना ये कोई जिद है, ये तो प्यार भरी ललकार है तुझको।
आज करुँगा अनेको बार दरकार, होगी जरूरत तो करुँगा तकरार।
हक हैं तुम्हारा मुझपे, जो चाहे कर सकता है तू वो मेरे संग।
पर आज के दिन तुझे मेरा कहा होगा करना, चाहे पड़े लड़ना – झगड़ना।
दिल की चाहत है जब तक होगा न दीदार तेरा – मिलेगी ना राहत।
काम तो चल जायेगा बेमंन से, पर हो जायेगा आहत दिल।
मैं ना कहता हूँ हो गया मैं लायक तेरे, पर रखनी होगी बात तुझे।
क्यूँ ये ना है मुझे पता, पर कहाँ करना होगा तुझे मेरा।
मैंने लाखों बार दिया होगा धत्ता, पर न देना तू मुझको आज द्यता।


- डॉ.संतोष सिंह