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Hymn No. 1866 | Date: 16-Jul-2000
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सताया है तुझे बहुत, चूका न मौका तुझे सताने का।
सताया है तुझे बहुत, चूका न मौका तुझे सताने का।
कहना चाहता हूँ दिल की बात, कैसे होगी मुलाकात तुझसे।
पेट भरा होके भी हूँ भूखा, तेरा दीदार करने वास्ते।
हर पल सता रहा है मन को एक बात होगो कैसे दीदार।
बंदा करता है अरज, मत तू सोच आज तू कुछ आगे – पीछे का।
अभागा हूँ बदल दे भेरा भाग्य तू आज मिलने के वास्ते।
भर चैन नहीं, इतना है बेचैन दिल तेरे वास्ते।
हर लम्हा चौका जाता है कि प्रियतम कहीं तू तो नहीं।
कैंसे बताऊँ मन की बात, जहाँ उपजे मन में सैकड़ो ख्याल।
पर सच कहता हूँ हर ख्यालों में मेरे बस तू है।


- डॉ.संतोष सिंह