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Hymn No. 1868 | Date: 16-Jul-2000
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माना कि तुझे ना है यकीन चमत्कार करने में।
माना कि तुझे ना है यकीन चमत्कार करने में।
हम भी ना चाहते तू कर, पर जो सहजता से होता है उसे तो ना रोक।
अपने भोगों की पूर्ति करने वास्ते ना कहता हूँ करने की।
हालत है बड़ी खराब दिल की, सम्भल जायेगी पल भर के दीदार से।
रहम करके कर या फिदा होके, मौका मिला है तो लड़ - झगड़ के करायेंगे।
पर आज कुछ भी करके तुझे आना पड़ेगा मेरे पास।
दास हूँ तेरा पर प्रियतम् मानके करता हूँ तुझे प्यार बहुत।
तुझे रिझाने के वास्ते जो भी चाहे तू वो कर डालू आज मैं।
बेमजा हुआ जा रहा है इतना अनोखा दिन तेरे दीदार के बिना।
एक – एक पल जीना होता न है मुहाल खाकसार का तेरे बिना।


- डॉ.संतोष सिंह