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Hymn No. 186 | Date: 21-Jun-1998
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हर दिन गुजर जाये तेरी मस्ती में; अहसास हो सिर्फ तेरे होने का;
हर दिन गुजर जाये तेरी मस्ती में; अहसास हो सिर्फ तेरे होने का;
सब कुछ खोके भी तूझे पाना पड़े तो स्वीकार है मुझे ।
तेरे चरण कमल को छूनें के लिये लालायित रहता हूँ हर पल,
सिर्फ तूझे और तेरी बातें सुननें के लिये तरसता है मेरा मन ।
हर क्षण कैसे भी कुछ भी करके रहूँ तेरे साथ तो तन का हो या मन का,
जिस पल भी मैं तूझे भुलूँ, वो पल कितना भी सुखद हो, पर है नरक के समान ।
तेरे दर पे आने के लिये चलना पड़े कांटो पे तो स्वीकार है मुझे ।
तेरी झलक पाने के लिये आग की दरिया से गुजरना पड़े तो स्वीकार है मुझे
हर सुख दुःख में बस तेरी नजरे इनायत चाहते है, पार हो जायेंगे तुझमें खोके ।
तुझसे कम हमें कुछ स्वीकार ना है, तुझसे कम हम तूझे ही चाहेंगे ।


- डॉ.संतोष सिंह