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Hymn No. 187 | Date: 22-Jun-1998
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जैसे – जैसे दिल डूबता जा रहा है तुझमें, यूँ ही मुस्कुराहट आ जाती है लब पे,
जैसे – जैसे दिल डूबता जा रहा है तुझमें, यूँ ही मुस्कुराहट आ जाती है लब पे,
कुछ – कुछ पल के लिये तुझमें खोने लगा हूँ, पल भर के लिये भूल जाता हूँ खुदको ।
जब – जब तेरा ख्याल आ जाता है, कहाँ हूँ मैं इसका अहसास मन से निकल जाता है;
दल – दल में कंठ तक डूबा था मैं, तेरे नाम के सहारे उबरता जा रहा हूँ,
धीरे – धीरे बंद नैनों के पीछे, तेरी छवि नजर आने लगी है ।
किसी – किसी दिन तू साथ है मेरे, इसका सुखद अहसास हर क्षण भर रहता है मुझे,
ना – ना करते थे जो लोग मुझे, अब तेरी कृपा से हाँ हां करते है ।
बार – बार जो मैं तुझसे जुडता जा रहा हूँ, साथ रहके भी लोगों के अलग – थलग पड़ता जा रहा हूँ।
आते – आते तेरे पास मैं, मैं से निकलते जा रहा हूँ, अब हर चेहरा पहचाना सा लगता है।


- डॉ.संतोष सिंह