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Hymn No. 191 | Date: 29-Jun-1998
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वो काका ही मेरे लिये सब कुछ है, मेरा परम् पिता परमेश्वर वो ही है ।
वो काका ही मेरे लिये सब कुछ है, मेरा परम् पिता परमेश्वर वो ही है ।
मेरे संग हर पल वो रहता है, उसके रहने का अहसास मुझे हो या न हो ।
मेरे जीवन की नैया का वो है खिवैया; आज नहीं कल पार उसे लगाना है ।
मैं दुःख में रहूँ या सुख में, मेरे आनंद का दाता वो है ।
मैं अज्ञानी कुछ भी न जानूँ, मुझे ज्ञान कराने वाला वो है ।
मेरा प्यार उससे है, उसके लोगों से नहीं, इसके सिवाय में कुछ नहीं जानना चाहूँ ।
मैं नाम लेता हूँ उसका हर पल, मेरे मन में गीतों को जन्म देता है वो ।
क्या लिखा, क्या न लिखा, इसका अहसास ना हो मुझे; उसके मन की तरंग मेरे दिल में आकार लेती रहे ।
कब तक दूर रहूँगा उससे, एक दिन शरण देगा मुझे अपने चरणों में ।
इसकी कृपा से जनमें है हम, एक दिन बुलायेंगा अपने पास ।


- डॉ.संतोष सिंह