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Hymn No. 192 | Date: 30-Jun-1998
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जो भी करूँगा गुरू का नाम लेके, जो भी किया गुरु कृपा से, गुरू कृपा से ।
जो भी करूँगा गुरू का नाम लेके, जो भी किया गुरु कृपा से, गुरू कृपा से ।
हर पल मेरा बीत रहा है गुरू की यादों में गुरू कृपा से, गुरू कृपा सें।
शीश झुका के गुरु के आगे, हर नये काम की शुरूआत करूँगा, गुरू कृपा से, गुरू कृपा से ।
रूखा – सूखा या जो भी भोजन मिलेगा, गुरू का सौप के ग्रहण करूंगा गुरू कृपा से, गुरू कृपा से।
सुख दुख के पलों में गुरू को याद करके कहूँगा जो भी हुआ अच्छा हुआ गुरू कृपा से, गुरू कृपा से।
नित्य मैं नये गीत रचुँगा गुरू को प्रणाम करके झूमते हुये कहूँगा गुरू कृपा से, गुरू कृपा से ।
अपने दिल की हर बात कहूँगा गुरू से बिना दुराव छिपाव के गुरू कृपा से, गुरू कृपा से।
गुरू के बिन दुनिया है मेरी अधूरी, गुरू ही मेरा सब कुछ है गुरू कृपा से, गुरू कृपा से।
सबको बता दूँगा मैं, गुरू ही मेरा परम् पिता परमेश्वर है गुरू कृपा से, गुरू कृपा से।
गुरू को प्रणाम करके खुद को खो दूँगा इस गुरू में गुरू कृपा से गुरू कृपा से ।


- डॉ.संतोष सिंह