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Hymn No. 196 | Date: 05-Jul-1998
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तेरे दर पे आने के लिये, हर उस रास्s से गुजर जाऊँगा जो मेरे लिये अंजान है;
तेरे दर पे आने के लिये, हर उस रास्s से गुजर जाऊँगा जो मेरे लिये अंजान है;
तेरे मेरे बीच की दूरियाँ कम करने के लिये लूँगा हर पल नाम तेरा ।
तुझको अपना बनाने के लिये, रहके तेरी शरण में नये – नये तराने छेडूँगा;
तेरी इनायत रहेगी इस गरीब पे, तो सबकी मदद करता रहूँगा ।
खुद को सौंप देंगे तेरे श्री चरणों में जो तू चाहेगा वही करेगे;
मिन्नत तुझसे बस इतनी सी है, सिखा दे हमें तेरी नजरों की भाषा।
तेरा इशारा होगा नजरों से, वह कार्य पलक झपकते कर गुजरेंगे हम;
जो भी कर्म करेंगे डूबके तुझमें, उसका अहसास ना हो हमको ।
रहे हमारा मन हर पल तुझमें खोया, श्वास चल रही हो या बंद कुछ ना हो पता ।


- डॉ.संतोष सिंह