VIEW HYMN

Hymn No. 198 | Date: 08-Jul-1998
Text Size
मेरे वश का काम कुछ नजर नहीं आता, मेरा दिल – दिमाग है तेरे वश में,
मेरे वश का काम कुछ नजर नहीं आता, मेरा दिल – दिमाग है तेरे वश में,
स्वाधीन रहके नहीं है मुझे जीना, तेरी छत्र – छाया में जिंदगी है गुजारनी ।
तेरे हवाले अब मेरा सब कुछ है, तेरे सिवाय कुछ भी नहीं मेरा,
मुझपे ना है अब मेरा अधिकार, है भी तो सिर्फ तेरा ।
तेरे – मेरे बीच की दूरी का अहसास करते ही, चीत्कार कर उठता है मेरा दिल,
तेरे बिन एक पल भी ना है, गँवारा तन से दूर रह लें, मन जुडा रहे सदा तुझसे ।
मेरी हर हसरत जुड़ी हुयी है तुझसे, तेरे बिन अधूरी है मेरी हर हसरत;
यूँ ही खामोश होके अपलक तुझे निहारने का मन करता है।
गुमसुम होके मन ही मन तुझसे, हर पल बतियाने का दिल करता है;
जमाने भर से नाता तोड़के, अब तुझसे जुड जाने का दिल करता है ।


- डॉ.संतोष सिंह