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Hymn No. 199 | Date: 08-Jul-1998
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कौन कहता है हमसे हमारा खुदा दूर रहता है ;
कौन कहता है हमसे हमारा खुदा दूर रहता है ;
हमारा ख़ुदा तो साथ – साथ, हर पल रहता है हमारे मन में।
कौन कहता है ख़ुदा को कोई आकार नहीं है,
खुदा तो साकार है, कृपा चाहिये उसे देखने के लिये उसकी ।
कौन कहता है ख़ुदा के दर पे देर है अँधेर नहीं,
अँधेरा तो हमारे मन में छाया है, वहाँ ना देर है ना ही अँधेर ।
कौन कहता है खुदा बसता है मंदिर और मस्जिदो में
वह बसता है सच्चे दिलों में, हम उसे किसी पिंजडे में नहीं बंद कर सकते।
कौन कहता है ख़ुदा से नहीं हो सकती मुलाकात;
एक बार तू प्यार कर ले उससे, देख फिर पीछे – पीछे दौड़ा वो आयेगा ।


- डॉ.संतोष सिंह