Hymn No. 200 | Date: 09-Jul-1998
डूब जायेगे, डूब जायेगे, डूब जायेगे एक दिन तुझमें हम डूब जायेगे ।
डूब जायेगे, डूब जायेगे, डूब जायेगे एक दिन तुझमें हम डूब जायेगे । पार किसे जाना है, मझधार से क्यों डरना है, अहसास किसे करना है । जब तेरे हवाले किया अपने आप को, तो किसका विचार है करना; हम तो बस तेरा नाम लेंगे, नाम लेने का अहसास भी क्यों करना । डूब जायेगे, डूब जायेगे, डूब जायेगे इक् दिन तुझमें हम डूब जायेगे, प्यार तुझको करेंगे पहले हम, फिर तू हमको करेगा, कौन किसको करेगा, चारों और प्यार ही प्यार होगा, कोई ना गैर कोई ना अपना होगा तैरने और डूबने की फिक्र क्यों होगी, प्यार की मौजों में बह जायेगे हम, डूब जायेगे, डूब जायेगे, डूब जायेगे तेरे प्यार की अतुलित गहराइयों में डूब जायेगे । जोर ना ही हमारे तुझपे होगा, ना ही कोई बात हमको गँवारा होगा, वहाँ हर बात अपनी होगी, बेगानेपन का नामोनिशान न होगा, हम सबका अस्तित्व तुझमें होगा, हर तरफ तू ही तू रहेगा; डूबने और तैरने की बात न होगी, फिर भी कहेंगे हम; डूब जायेगे, डूब जायेगे, डूब जायेगे एक दिन तुझमें हम डूब जायेगे । इस दुनिया में हम है कि हम मैं ये दुनिया, आश्चर्य अनोखा कुछ न होगा; सब कुछ घटता रहेगा, पर घटने का अहसास ना होगा, मूक साक्षी रहेगे हम तेरे संग; मौत और जीवन का खेल जारी रहेगा, एक दुनिया मिटती और नई दुनिया बसती नजर आयेगी डूब जायेगे, डूब जायेगे, डूब जायेगे एक दिन तुझमें हम डूब जायेगे।
- डॉ.संतोष सिंह
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