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Hymn No. 2041 | Date: 18-Oct-2000
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दिन ढल जाये रात गुजर जाये, खत्म न हो कभी तेरी प्यार भरी बाते।
दिन ढल जाये रात गुजर जाये, खत्म न हो कभी तेरी प्यार भरी बाते।
हमारा हाल ये हो, तुम्हारे सामने बैठे – ठाले ढल जाऊँ प्यार में तेरे।
बदलने की राह देख रहा हूँ, कब क्या घट जाये रहबर तेरे रहमो करम से।
धर्म का मर्म न जाना था कभी, पर मन को बहुत सुहाता था तू हमेशा से।
जागनें का ढोंग बहुत कर लिया, तेरे प्यार में बेसुध होके जाग जाने की बारी अब आयी।
सवारी किया न जोन कब किसपे, अब तेरे संवार होने की बारी आयी हमपे।
मरवाह न रही हमको निकलने की जां, इस जानवर की जान बन गया जो तू।
जानते जा रहा हूँ अब आ गयी है बारी खामोशी की, पर रखना बात जारी दिल ही दिल में।
जतन कर न सका कभी कुछ व्यवहार में जतन कर लेने देना मुझको तेरे प्यार को।
सालता नहीं कोई काज मुझे आज, सालता है तो वो पल जिसमें रहता हूँ दूर तुझसे।


- डॉ.संतोष सिंह