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Hymn No. 2042 | Date: 21-Oct-2000
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छूपा ले हमको आँचल में अपने, लगने न दे दुनिया की हवा तू।
छूपा ले हमको आँचल में अपने, लगने न दे दुनिया की हवा तू।
मिलनेना मिलने से परे तू बना ले काबील अपने मुझकों।
गोया इतना ताकतवर न हूँ, कि मिटा दूँ हर कमी को अपने से।
कोई है भी तो नही तेरे सिवाय मेरा अपने भी तो साथ छोड़ देते है।
पकड़ ले तू हाथ मेरा छूटने ना पाये जीवन की अनजान डगर पे।
नाथ ले तू मेरे मन को हो जाऊँगा में सनाथ तेरे साथ रहके।
जो भी है तेरे मेरे बीच की दूरी खत्म कर दे तू उसे आज।
गाज कितनी भी गिरी मैं न छोडू कभी तेरा साथा
बेचैंन दिल का बन जा तू चैन, जीवन के हर पलों में बजाऊँ चैन की बंसी।
अंत कर देना इस अंतहीन सफर को अपने प्यार के रंग में रंगके।


- डॉ.संतोष सिंह